व्रत में क्या खाएँ क्या न खाएँ? – आयुर्वेद और विज्ञान की राय
भारत में व्रत केवल धार्मिक परंपरा नहीं बल्कि शरीर और मन की शुद्धि का भी माध्यम है। आयुर्वेद में उपवास (फास्टिंग) को आत्म-शुद्धि और पाचन तंत्र को आराम देने का साधन माना गया है। वहीं आधुनिक विज्ञान भी मानता है कि सही तरीके से किया गया उपवास डिटॉक्स, ब्लड शुगर नियंत्रण और वज़न प्रबंधन में मदद करता है। लेकिन समस्या यह है कि व्रत के दौरान बहुत से लोग या तो ज़्यादा तैलीय और तली हुई चीज़ें खा लेते हैं, या फिर बिल्कुल भूखे रहकर कमजोरी महसूस करने लगते हैं। ऐसे में ज़रूरी है कि हम समझें – व्रत में क्या खाना चाहिए और किन चीज़ों से बचना चाहिए। आयुर्वेद की नजर से व्रत का महत्व आयुर्वेद कहता है कि उपवास से शरीर की अग्नि (digestive fire) को संतुलित करने और आम (toxins) को निकालने का मौका मिलता है। सात्त्विक आहार – व्रत में हल्का, सुपाच्य और सात्त्विक भोजन करना चाहिए। जल और फल – शरीर को हाइड्रेटेड और एनर्जेटिक बनाए रखते हैं। अत्यधिक तैलीय/भारी भोजन – पित्त, कफ और वात असंतुलन पैदा कर सकता है। विज्ञान की नजर से व्रत का महत्व आधुनिक रिसर्च के अनुसार: व्रत से इंसुलिन सेंसिटिव...